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कार्तिक एवं अगहन मास में निकलेगी नगर भ्रमण पर निकलेंगे बाबा महाकाल, 4 नवंबर को पहली और 25 नवंबर को राजसी ठाठबाट से निकलेगी आखिरी सवारी
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन एक धार्मिक नगरी है और यहाँ के राजा बाबा महाकाल हैं। राजा होने के नाते भगवान हर पर्व-त्योहार पर नगर भ्रमण पर निकलते हैं। ऐसे में श्रावण-भादौ और दशहरा पर्व के बाद राजाधिराज भगवान महाकाल कार्तिक एवं अगहन मास में भी भक्तों को दर्शन देने के लिए राजसी ठाठबाट से नगर भ्रमण पर निकलेंगे।
इसमें दो सवारी कार्तिक मास और दो सवारी अगहन मास में निकलेगी। कार्तिक-अगहन मास में पहली सवारी 4 नवंबर को निकाली जाएगी। दूसरी सवारी 11 नवंबर को निकलेगी। 14 नवंबर को बैकुंठ चतुर्दशी पर हरिहर मिलन होगा। इसके बाद तृतीय सवारी अगहन मास में 18 नवंबर को निकलेगी। कार्तिक-अगहन मास की अंतिम सवारी 25 नवंबर को धूमधाम से निकाली जाएगी।
श्री महाकालेश्वर मंदिर में ग्वालियर के पंचांग के अनुसार सभी पर्व और त्योहार मनाए जाते हैं। मंदिर से निकलने वाली सवारियों का संचालन भी पंचांग में निर्धारित तिथियों के अनुसार किया जाता है। प्रतिवर्ष श्रावण-भादौ मास के अलावा दशहरा के अवसर पर फ्रीगंज तक सवारी आती है। इसके अतिरिक्त, कार्तिक-अगहन मास में प्रत्येक सोमवार को मंदिर के आंगन से भगवान महाकाल की चार सवारी निकलती हैं। एक विशेष सवारी दीपावली के बाद वैकुंठ चतुर्दशी पर भी निकाली जाएगी।
कार्तिक और अगहन माह में 4, 11, 18 नवंबर को महाकालेश्वर मंदिर से तीन सवारी निकाली जाएगी। यह सवारी शाम चार बजे मंदिर से प्रारंभ होकर गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी होते हुए रामघाट शिप्रा तट पहुंचेगी। यहां भगवान श्री महाकालेश्वर का मां शिप्रा के जल से पूजन और अभिषेक किया जाएगा। वापसी के समय, सवारी रामघाट से गणगौर दरवाजा, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी चौराहा होते हुए महाकालेश्वर मंदिर लौटेगी।
25 नवंबर को होने वाली अगहन माह की दूसरी और क्रमशः चौथी तथा अंतिम राजसी सवारी अपने पारंपरिक मार्ग से श्री महाकालेश्वर मंदिर से प्रारंभ होकर गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंचेगी। वहां मां शिप्रा के जल से भगवान श्री महाकाल का पूजन-अभिषेक करने के बाद, सवारी रामघाट से गणगौर दरवाजा, कार्तिक चौक, सत्यनारायण मंदिर, टंकी चौराहा, तेलीवाड़ा, कंठाल चौराहा, सती गेट, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार होते हुए पुनः श्री महाकालेश्वर मंदिर लौटेगी।